चाय में चीनी कम, पहचान ज़्यादा — जबलपुर में ‘चाय जिहाद’ का नया कप तैयार!”

कटनी/जबलपुर। देश में चाय वैसे तो सर्दी भगाने और नींद उड़ाने के काम आती है, लेकिन अब लगता है कि चाय की दुकानें पहचान की राजनीति भी गरमा रही हैं। ताज़ा मामला मध्यप्रदेश के Jabalpur से सामने आया है, जहां एक साधारण सी चाय की दुकान अचानक राष्ट्रीय बहस का विषय बन गई।

बताया जा रहा है कि Adhartal Tiraha पर चल रही एक चाय की दुकान के नाम को लेकर ऐसा बवाल उठा कि चाय के कप से ज्यादा गर्म चर्चा शुरू हो गई। मंगलवार रात करीब 8 बजे कुछ कार्यकर्ता Hindu Sena के बैनर तले Adhartal Police Station पहुंच गए और बाकायदा ज्ञापन सौंपकर मांग कर डाली कि चाय के साथ पहचान भी साफ-साफ परोसी जाए।

संगठन का कहना है कि दुकान का नाम “हिंदू पहचान” से जुड़ा है, जबकि संचालक मुस्लिम समुदाय से बताया जा रहा है। इससे लोगों में भ्रम की स्थिति बन सकती है। यानी अब ग्राहक को चाय ऑर्डर करने से पहले यह भी देखना पड़ सकता है कि चाय पत्ती किस धर्म की है और दूध किस आस्था का।

ज्ञापन में यह भी सवाल उठाया गया कि यदि दुकानदार मुस्लिम है तो उसे हिंदू नाम से दुकान चलाने की ज़रूरत ही क्या है। संगठन के पदाधिकारियों ने पुलिस से मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की मांग की है।

उधर पुलिस ने भी लोकतांत्रिक परंपरा निभाते हुए ज्ञापन स्वीकार कर लिया और भरोसा दिलाया कि मामले की जांच की जाएगी। फिलहाल इलाके में शांति है और चाय के कप सामान्य तापमान पर ही परोसे जा रहे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि दुकान पर पहले कभी कोई विवाद नहीं हुआ था। लोग आते थे, चाय पीते थे, बिस्किट डुबोते थे और चले जाते थे। लेकिन जैसे ही सोशल मीडिया पर “नाम” की चुस्की लगी, वैसे ही भीड़ भी बढ़ गई और मुद्दा भी।

अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या आने वाले समय में चाय की दुकानों के बाहर मेन्यू कार्ड के साथ “धार्मिक पहचान बोर्ड” भी लगाना पड़ेगा? ताकि ग्राहक यह तय कर सके कि उसे अदरक वाली चाय चाहिए या पहचान वाली।

व्यंग्य की दुनिया में एक पुरानी कहावत है —

“देश में मुद्दों की कमी नहीं, बस केतली चढ़ाने की देर है।”

फिलहाल जबलपुर में चाय का कप फिर से बहस के उबाल पर है। अब देखना यह है कि पुलिस जांच में चाय ठंडी होती है या राजनीति और गरम।

– दर्पण 24 न्यूज 🫖📰

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