कटनी/भोपाल।
मध्यप्रदेश में रसोई गैस की कमी की चर्चाओं ने जैसे ही बाजार और सोशल मीडिया में सिर उठाया, सरकार ने तुरंत सफाई देते हुए साफ कर दिया कि प्रदेश में न तो डीजल-पेट्रोल की कमी है और न ही रसोई गैस की। हां, अफवाहों का सिलेंडर जरूर फुल भरा हुआ घूम रहा है, जिसे कुछ लोग बड़ी तेजी से घर-घर पहुंचाने में लगे हैं।
सरकार का कहना है कि प्रदेश में ईंधन की सप्लाई पूरी तरह सामान्य है। लेकिन जैसे ही किसी मोहल्ले में यह खबर उड़ती है कि “गैस खत्म होने वाली है”, वैसे ही लोग ऐसे दौड़ पड़ते हैं जैसे आखिरी सिलेंडर पर देश की अर्थव्यवस्था टिकी हो। नतीजा — एजेंसियों के बाहर लंबी लाइनें और फिर वही पुराना सवाल, “गैस कहां गई?”
प्रशासन का कहना है कि समस्या गैस की कमी से ज्यादा अफवाहों की अधिकता से पैदा हो रही है। कुछ लोग इस माहौल का फायदा उठाकर जमाखोरी और कालाबाजारी का खेल भी शुरू कर देते हैं। ऐसे लोगों के लिए सरकार ने साफ संदेश दिया है कि अगर कोई गैस एजेंसी, वितरक या निजी व्यक्ति सिलेंडर की कालाबाजारी या जमाखोरी करते पकड़ा गया, तो उसके खिलाफ सीधे एफआईआर दर्ज होगी और कानून का ऐसा सिलेंडर फटेगा कि याद रह जाएगा।
सरकार ने यह भी कहा है कि आम नागरिकों को घबराने की जरूरत नहीं है। प्रदेश में पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। इसलिए “सुना है गैस खत्म हो रही है” जैसी खबरों पर भरोसा करने से बेहतर है कि आधिकारिक जानकारी पर विश्वास किया जाए।
गैस नहीं दे रहा डीलर? सीधे यहां करें शिकायत
अगर किसी उपभोक्ता को गैस एजेंसी द्वारा अनावश्यक परेशान किया जा रहा है या सिलेंडर देने में टालमटोल की जा रही है, तो सीधे कंपनी के कस्टमर केयर नंबर पर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
👉 भारत गैस हेल्पलाइन नंबर
1800-22-4344 (टोल फ्री)
👉 इंडेन गैस कस्टमर केयर नंबर
1800-2333-555 (टोल फ्री)
👉 एचपी गैस कस्टमर केयर नंबर
1800-2333-555 (टोल फ्री)
प्रशासन ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि अफवाहों के बाजार को बढ़ावा न दें और किसी भी तरह की समस्या होने पर सीधे आधिकारिक माध्यमों से शिकायत दर्ज कराएं।
कुल मिलाकर सरकार का संदेश साफ है —
“गैस की कमी से ज्यादा खतरनाक अफवाहों की आग है। इसलिए सिलेंडर भरवाने से पहले दिमाग जरूर भर लें।”
✍️ दर्पण 24 न्यूज
गैस की अफवाहों पर सरकार सख्त: “सिलेंडर कम नहीं, अफवाहें ज्यादा हैं” कालाबाजारी करने वालों की अब खैर नहीं, सरकार बोली — जरूरत हो तो हेल्पलाइन है, हंगामा करने की नहीं
