बरसात के पानी का संचय समय की जरूरत: वाटर हार्वेस्टिंग से बच सकता है भविष्य का जल संकट

संपादकीय ✍️ घनश्याम दास, संरक्षक – दर्पण 24 न्यूज
देश के कई हिस्सों में हर साल बरसात के दौरान लाखों लीटर पानी बहकर नदियों और नालों के जरिए बर्बाद हो जाता है, जबकि दूसरी ओर गर्मियों में पानी की भारी किल्लत देखने को मिलती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बरसात के पानी का सही तरीके से संचय किया जाए तो आने वाले समय में जल संकट से काफी हद तक बचा जा सकता है। इसी उद्देश्य से “वाटर हार्वेस्टिंग” यानी वर्षा जल संचयन की तकनीक को बढ़ावा दिया जा रहा है।
क्या है वाटर हार्वेस्टिंग
वाटर हार्वेस्टिंग का मतलब है बारिश के पानी को इकट्ठा करके उसे जमीन के अंदर या किसी टैंक में सुरक्षित रखना, ताकि जरूरत पड़ने पर इसका उपयोग किया जा सके। यह पानी खेती, बागवानी, घरेलू उपयोग और भूजल स्तर बढ़ाने में बेहद मददगार साबित होता है।
क्यों जरूरी है वर्षा जल संचयन
भारत जैसे देश में भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है। कई शहरों और गांवों में गर्मियों के दौरान हैंडपंप और कुएं सूख जाते हैं। अगर बारिश के पानी को संरक्षित किया जाए तो यह भूजल को रिचार्ज करने में मदद करता है और भविष्य के लिए पानी उपलब्ध रहता है।
वर्षा जल संचयन के प्रमुख तरीके
1. रूफटॉप वाटर हार्वेस्टिंग
घर या इमारत की छत पर गिरने वाले बारिश के पानी को पाइप के जरिए टैंक या जमीन के अंदर बने रिचार्ज पिट में जमा किया जाता है। यह सबसे आसान और कम खर्च वाला तरीका माना जाता है।
2. रिचार्ज पिट या सोख्ता गड्ढा
जमीन में गड्ढा बनाकर उसमें ईंट, गिट्टी और रेत भर दी जाती है। छत या आंगन से आने वाला पानी इस गड्ढे में डाल दिया जाता है, जिससे पानी धीरे-धीरे जमीन में समा जाता है और भूजल स्तर बढ़ता है।
3. तालाब और छोटे जलाशय
ग्रामीण क्षेत्रों में बरसात के पानी को रोकने के लिए तालाब, चेकडैम और छोटे जलाशय बनाए जाते हैं। इससे सिंचाई और पशुओं के लिए पानी उपलब्ध रहता है।
4. खेत तालाब और कंटूर बंडिंग
किसानों के लिए खेत में छोटे तालाब बनाना और मिट्टी के बांध बनाकर पानी रोकना बहुत उपयोगी तरीका है। इससे बारिश का पानी खेत में ही रुकता है और फसल को फायदा मिलता है।
वाटर हार्वेस्टिंग के फायदे
भूजल स्तर बढ़ता है
गर्मियों में पानी की कमी कम होती है
बिजली और पानी के बिल में बचत होती है
खेती और बागवानी को फायदा मिलता है
पर्यावरण संतुलन बना रहता है
सरकार भी दे रही है प्रोत्साहन
कई राज्यों में नई इमारतों में वर्षा जल संचयन प्रणाली लगाना अनिवार्य किया जा रहा है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में तालाब और जल संरक्षण के लिए योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिससे लोग जल संरक्षण के प्रति जागरूक हो सकें।
जनभागीदारी जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल सरकारी योजनाओं से जल संकट का समाधान संभव नहीं है। इसके लिए हर नागरिक को अपने घर, खेत और मोहल्ले में वर्षा जल संचयन की व्यवस्था करनी होगी।
यदि हर घर और हर गांव में वाटर हार्वेस्टिंग को अपनाया जाए तो आने वाले समय में पानी की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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