पशुओं की जब्ती और देखभाल पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र सरकार से मांगा विस्तृत जवाब

दिनेश कुमार सम्पादक दर्पण 24 न्यूज़ | नई दिल्ली

देश में जब्त किए जाने वाले पशुओं की देखभाल और उनके संरक्षण से जुड़े मामलों को लेकर Supreme Court of India ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने इस गंभीर मुद्दे पर चिंता व्यक्त करते हुए Government of India से विस्तृत जवाब मांगा है। कोर्ट ने पूछा है कि जब पुलिस या प्रशासन किसी मामले में पशुओं को जब्त करता है, तो उनकी देखभाल, रहने की व्यवस्था और मालिक को वापस सौंपने की प्रक्रिया क्या होती है और इसके लिए कौन जिम्मेदार होता है।

पशुओं की देखभाल को लेकर कोर्ट ने जताई चिंता

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि कई मामलों में पुलिस या प्रशासन पशुओं को जब्त कर लेते हैं, लेकिन इसके बाद उनकी देखभाल को लेकर स्पष्ट व्यवस्था दिखाई नहीं देती। ऐसे पशुओं को अक्सर लंबे समय तक सरकारी या निजी आश्रय स्थलों में रखा जाता है, जहां पर्याप्त संसाधन और व्यवस्थाएं उपलब्ध नहीं होतीं।

अदालत ने इस स्थिति को चिंताजनक बताते हुए कहा कि इससे पशुओं के स्वास्थ्य और जीवन पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। कोर्ट ने यह भी पूछा कि जब किसी मामले में पशुओं को जब्त किया जाता है, तो उनकी देखरेख की जिम्मेदारी किस संस्था या विभाग की होती है और इसके लिए क्या कोई स्पष्ट नियम या दिशा-निर्देश बनाए गए हैं।

लंबे मुकदमों के कारण आश्रय स्थलों में पड़े रहते हैं पशु

अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि कई मामलों में मुकदमे वर्षों तक चलते रहते हैं। इस दौरान जब्त किए गए पशु आश्रय स्थलों में ही पड़े रहते हैं। लंबे समय तक उचित देखभाल न मिलने के कारण उनकी स्थिति खराब हो जाती है, जो पशु कल्याण के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।

कोर्ट ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में पशुओं को अनावश्यक कष्ट झेलना पड़ता है और यह व्यवस्था सुधार की मांग करती है।

केंद्र सरकार से मांगी एक समान नीति की जानकारी

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से यह भी पूछा है कि क्या देशभर में पशुओं की जब्ती और उनकी देखभाल को लेकर कोई एक समान नीति या दिशा-निर्देश बनाए गए हैं या नहीं। यदि ऐसी कोई नीति नहीं है, तो इस संबंध में क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

अदालत ने केंद्र सरकार को इस मामले में विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

पशु अधिकार संगठनों ने उठाए सवाल

इस मामले को लेकर पशु अधिकार से जुड़े कई संगठनों ने भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि देश में कई बार पशु तस्करी, अवैध परिवहन या अन्य मामलों में पशुओं को जब्त तो कर लिया जाता है, लेकिन उनके रखरखाव के लिए पर्याप्त संसाधन और स्पष्ट व्यवस्था नहीं होती।

ऐसी स्थिति में कई बार पशु आश्रय स्थलों पर अत्यधिक बोझ बढ़ जाता है और पशुओं को उचित भोजन, चिकित्सा और देखभाल नहीं मिल पाती।

आगे आ सकते हैं महत्वपूर्ण निर्देश

अब इस मामले में केंद्र सरकार के जवाब के बाद सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए जा सकते हैं। माना जा रहा है कि अदालत पशुओं की जब्ती, संरक्षण और देखभाल से जुड़े नियमों में सुधार के लिए नई व्यवस्था लागू करने के निर्देश दे सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस दिशा में स्पष्ट और प्रभावी नीति बनाई जाती है, तो इससे न केवल पशुओं के संरक्षण को मजबूती मिलेगी बल्कि पशु कल्याण से जुड़े मामलों में भी पारदर्शिता और जिम्मेदारी सुनिश्चित होगी।

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