नई दिल्ली। जब देश में आम आदमी पेट्रोल-डीजल के दाम देखकर अपने स्कूटर को “योगासन” करवाने लगा है और कई लोग गाड़ी से ज्यादा पैदल चलने की आदत डाल रहे हैं, तभी भारत सरकार ने पड़ोसी धर्म निभाते हुए पाइपलाइन समझौते के तहत बांग्लादेश को 5,000 टन डीजल की खेप भेज दी।
सरकारी सूत्रों के अनुसार यह कदम “अंतरराष्ट्रीय मित्रता और ऊर्जा सहयोग” को मजबूत करने के लिए उठाया गया है। हालांकि देश के कई लोग इसे “पड़ोसी प्रेम का ओवरडोज” भी बता रहे हैं।
आम नागरिकों का कहना है कि यहां तो हालत यह है कि लोग गाड़ी स्टार्ट करने से पहले पेट्रोल पंप के रेट देखकर मानसिक तैयारी करते हैं, लेकिन सरकार इतनी दरियादिल है कि पड़ोसी को हजारों टन डीजल भेजने में भी पीछे नहीं हटती।
एक स्थानीय व्यंग्यकार ने कहा, “भारत की यही महानता है। घर में चूल्हा थोड़ा धीमा जल जाए तो कोई बात नहीं, लेकिन पड़ोसी की रसोई में आग कम नहीं होनी चाहिए।”
उधर सोशल मीडिया पर भी लोगों ने मजेदार प्रतिक्रियाएं दीं। किसी ने लिखा, “सरकार का दिल इतना बड़ा है कि डीजल भी एक्सपोर्ट कर देती है और जनता को फिट रखने के लिए पैदल चलने की प्रेरणा भी देती है।”
विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों में ऊर्जा सहयोग जरूरी है, लेकिन आम जनता का मानना है कि अगर डीजल की कुछ बूंदें देश के ट्रैक्टरों और बाइक में भी ज्यादा पहुंच जाएं तो किसानों और आम लोगों का भी “अंतरराष्ट्रीय स्तर का” मनोबल बढ़ सकता है।
फिलहाल सरकार का संदेश साफ है — “पड़ोसी खुश तो हम खुश… और जनता? वो तो समझदार है ही।
पड़ोसी धर्म निभाने में अव्वल भारत, खुद महंगाई झेले… पड़ोसी को डीजल दे दे!
