दिल्ली के जंतर मंतर और दशहरा मैदान में 8 मार्च को स्वर्ण वर्ग द्वारा University Grants Commission (UGC) बिल के खिलाफ बड़ा आंदोलन होना था। दावा किया गया कि पूरे देश से लाखों लोग दिल्ली पहुंचने वाले थे, लेकिन प्रशासन ने आंदोलन की “सफलता” का इतना ख्याल रखा कि एक दिन पहले से ही बाहर से आने वालों का स्वागत सीधे पुलिसिया व्यवस्था से होने लगा।
राष्ट्रीय ब्राह्मण महानसंस्था की राष्ट्रीय प्रभारी वंदना द्विवेदी ने कहा कि आंदोलन को रोकने के लिए शासन ने पूरा प्रयास किया। कई नेताओं को तो इतना सम्मान दिया गया कि उन्हें “हाउस अरेस्ट” कर घर में ही आराम करने का मौका दे दिया गया, ताकि वे आंदोलन की भागदौड़ से बच सकें।
बताया जा रहा है कि कई बहनों को दिल्ली पहुंचने से पहले ही पुलिस ने रोक लिया, शायद प्रशासन को डर था कि कहीं आंदोलन में भीड़ ज्यादा न हो जाए और दिल्ली का ट्रैफिक जाम न हो जाए। इसलिए सुरक्षा के तौर पर उन्हें सीधे पुलिस थाने तक “VIP एस्कॉर्ट” दे दिया गया।
हालांकि आयोजकों का कहना है कि स्वर्ण वर्ग का आंदोलन हमेशा शांतिपूर्ण और संवैधानिक दायरे में होता है। फिर भी उनकी मांगों को गंभीरता से लेने के बजाय उन्हें गिरफ्तार करके थानों में बैठाया गया, जिससे आंदोलनकारियों को कम से कम बैठकर चर्चा करने का पूरा समय मिल गया।
वंदना द्विवेदी का कहना है कि UGC बिल बच्चों के भविष्य के लिए चुनौतियां पैदा करेगा और अगर इसे वापस नहीं लिया गया तो देश में वर्ग विद्रोह और बहिष्कार की स्थिति बन सकती है। वहीं शासन शायद अभी भी कैलकुलेटर लेकर यह समझने में लगा है कि आंदोलन ज्यादा बड़ा है या पेट्रोल के दाम।
फिलहाल दिल्ली में हालात ऐसे रहे कि आंदोलनकारियों ने आंदोलन किया, पुलिस ने गिरफ्तार किया और लोकतंत्र ने मुस्कुराकर कहा — “सब कुछ संवैधानिक प्रक्रिया के तहत हो रहा है।”
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दिल्ली में ‘शांतिपूर्ण’ आंदोलन, परमिशन से पहले ही परमिशन खत्म — नेताओं को घर में ही VIP बैठा दिया गया! वंदना दिवेदी राष्ट्रीय ब्राह्मण महानसंस्था की राष्ट्रीय प्रभारी
