अफीम के खेतों पर चली पुलिस की दरांती, किसानों को याद आया – ये “सरकारी फसल” नहीं थी!

संपादक दिनेश कुमार दर्पण 24 न्यूज़ 
मध्यप्रदेश में जहां एक तरफ किसान मौसम, पानी और समर्थन मूल्य की चिंता में लगे रहते हैं, वहीं कुछ “उन्नत सोच वाले किसान” सीधे अफीम की खेती कर करोड़पति बनने का शॉर्टकट ढूंढ लेते हैं। लेकिन इस बार उनकी यह “स्टार्टअप योजना” मध्यप्रदेश पुलिस की नजर से बच नहीं पाई।


मध्यप्रदेश पुलिस ने प्रदेश में अवैध मादक पदार्थों के खिलाफ सख्त अभियान चलाते हुए छतरपुर, टीकमगढ़ और दमोह जिलों में अवैध अफीम की खेती पर बड़ी कार्रवाई की। एक सप्ताह के भीतर पुलिस ने करीब 7890 किलोग्राम अफीम की फसल जब्त कर ली, जिसकी अनुमानित कीमत 3 करोड़ रुपये से ज्यादा बताई जा रही है।


जानकारी के मुताबिक छतरपुर के गढ़ीमलहरा थाना क्षेत्र से करीब 1140 किलो अफीम (करीब 70 लाख रुपये), टीकमगढ़ के दिगोड़ा क्षेत्र से 419 किलो (45 लाख रुपये से अधिक) और दमोह के तेजगढ़ क्षेत्र से 6331 किलो अफीम (लगभग 1.89 करोड़ रुपये) की फसल बरामद हुई। पुलिस ने पूरी फसल को जड़ सहित उखाड़कर जब्त कर लिया, जिससे खेतों में अफीम उगाने का “हरित क्रांति संस्करण” यहीं खत्म हो गया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि गांव में कुछ खेत इतने हरे-भरे दिखते थे कि लोग समझते थे किसान कोई नई उन्नत किस्म का फूल उगा रहे हैं। लेकिन जब पुलिस पहुंची तो पता चला कि यह “फूल” सीधे नशे की दुनिया में खिलने वाले थे।


पुलिस ने सभी मामलों में NDPS एक्ट के तहत अपराध दर्ज कर लिया है और आगे की कार्रवाई जारी है। अधिकारियों का कहना है कि प्रदेश में अवैध मादक पदार्थों के उत्पादन, संग्रहण और तस्करी को किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
हालांकि गांव के कुछ बुजुर्गों ने मजाक में कहा कि अब किसानों को फिर से गेहूं-चना की खेती पर लौटना पड़ेगा, क्योंकि अफीम की खेती में “मुनाफा ज्यादा था, पर जोखिम उससे भी ज्यादा।”
कुल मिलाकर पुलिस की इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि खेतों में अगर अफीम उगेगी, तो पुलिस भी वहीं उग आएगी — और फसल सीधे जब्ती में चली जाएगी।

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