सम्पादक दिनेश कुमार दर्पण 24 न्यूज़
जयपुर: सरकारी नौकरियों की दुनिया में प्रतिभा, मेहनत और पढ़ाई का महत्व अब शायद पुरानी किताबों की बात बनता जा रहा है। ताजा मामला जयपुर से सामने आया है, जहां चपरासी भर्ती में 0 नंबर लाने वाले अभ्यर्थी को भी सरकारी नौकरी मिल गई।
मामला जब हाईकोर्ट पहुंचा तो अदालत ने भी हैरानी जताते हुए पूछा कि आखिर भर्ती में न्यूनतम अंक तय क्यों नहीं किए गए? अगर कोई अभ्यर्थी शून्य अंक लाता है तो उसे भी नौकरी मिल सकती है क्या? कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि भर्ती प्रक्रिया में “कुछ तो बेसिक स्टैंडर्ड” होना चाहिए।
बताया जा रहा है कि भर्ती प्रक्रिया इतनी लोकतांत्रिक थी कि ज्ञान, मेहनत और योग्यता जैसे भेदभावपूर्ण तत्वों को पूरी तरह किनारे रख दिया गया। नतीजा यह हुआ कि जिन उम्मीदवारों ने सवालों को देखकर भी नहीं छुआ, वे भी सरकारी सेवा में प्रवेश पा गए।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह नई व्यवस्था ‘समान अवसर’ की असली मिसाल है, जिसमें पढ़ने वाले और न पढ़ने वाले दोनों को बराबरी का दर्जा मिला। कुछ बेरोजगार युवाओं ने तो खुशी जताते हुए कहा कि अगर यही सिस्टम रहा तो अब पढ़ाई का बोझ भी खत्म हो जाएगा और सीधे नौकरी के सपने पूरे होंगे।
उधर सोशल मीडिया पर लोग तंज कसते हुए कह रहे हैं कि अगर यही हाल रहा तो अगली भर्ती में “परीक्षा देना भी वैकल्पिक” कर दिया जाएगा और शायद आवेदन पत्र भरने पर ही नियुक्ति पत्र मिल जाएगा।
फिलहाल हाईकोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा है कि आखिर भर्ती प्रक्रिया में न्यूनतम योग्यता और अंक तय करने की जरूरत क्यों नहीं समझी गई।
अब देखना यह है कि सरकार इस सवाल का जवाब देती है या फिर शून्य अंक वालों की यह ऐतिहासिक उपलब्धि सरकारी भर्ती की नई परंपरा बन जाती है।
0 नंबर वालों की भी निकली लॉटरी! चपरासी भर्ती में ‘शून्य प्रतिभा’ को भी मिला सरकारी आशीर्वाद
