सम्पादक दिनेश कुमार दर्पण 24 न्यूज़
देश में पहचान का सबसे बड़ा प्रतीक बन चुका भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) अब आधार कार्ड में जन्मतिथि बदलने को लेकर इतना सख्त हो गया है कि लगता है मानो आदमी अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी गलती जन्म लेकर कर बैठा हो।
नई मानक संचालन प्रक्रिया के अनुसार अगर किसी ने जन्मतिथि बदलवाने के लिए गलत दस्तावेज लगा दिए, तो उसका आधार कार्ड सीधा निष्क्रिय हो सकता है। यानी अब गलती से भी अगर आपने अपनी उम्र दो-चार साल कम दिखाने की कोशिश कर दी, तो आधार कार्ड कहेगा – “भाई, पहले सही में पैदा होकर आओ, फिर आना।”
देश में अभी तक लोगों को लगता था कि आधार कार्ड में फोटो खराब हो, पता गलत हो या उम्र आधी सदी आगे-पीछे हो जाए तो भी कोई बड़ी बात नहीं। लेकिन अब भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण ने ऐसा नियम बनाया है कि जन्मतिथि बदलना लगभग वैसा ही कठिन हो गया है जैसे सरकारी दफ्तर में बिना चाय-पानी के काम हो जाना।
सूत्र बताते हैं कि इस नियम के बाद कई लोग अचानक अपनी असली उम्र याद करने की कोशिश में लग गए हैं। कुछ लोग स्कूल की मार्कशीट, कुछ लोग अस्पताल के कागज और कुछ तो मोहल्ले की दाई को ढूंढ रहे हैं कि “अम्मा, सच-सच बताओ हम पैदा कब हुए थे?”
सरकारी तर्क यह है कि कई लोग उम्र कम-ज्यादा कर के नौकरी, योजना और पेंशन का फायदा लेने की कोशिश करते हैं। लेकिन आम जनता का सवाल यह है कि अगर आधार ही बंद हो गया तो फिर वही आधार से मिलने वाली योजनाओं का क्या होगा?
अब हाल यह है कि लोग आधार अपडेट कराने से पहले दो बार सोच रहे हैं। क्योंकि अगर दस्तावेज जरा भी संदिग्ध लगे तो आधार कार्ड तुरंत “ध्यान मुद्रा” में चला जाएगा और फिर उसे जगाने के लिए शायद उतने ही कागज लगेंगे जितने किसी आदमी के जन्म के समय भी नहीं लगे होंगे।
फिलहाल जनता यही प्रार्थना कर रही है कि अगली बार कहीं ऐसा नियम न आ जाए कि “आधार में जन्मतिथि बदलने से पहले अस्पताल से जन्म का लाइव वीडियो भी जमा करना होगा।”
आधार में जन्मतिथि बदलना अब ‘जन्म लेने’ से भी मुश्किल! एक गलती और आधार जाएगा ध्यान मुद्रा में
