साम्पदक दिनेश कुमार दर्पण 24 न्यूज़
दुनिया में कहीं भी युद्ध हो, सबसे पहले असर अगर किसी पर पड़ता है तो वह है आम आदमी की जेब। ताजा खबर के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें एक बार फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। 2022 के बाद पहली बार तेल ने ऐसा ‘शतक’ लगाया है कि क्रिकेट प्रेमियों से ज्यादा पेट्रोल-डीजल के उपभोक्ता घबरा गए हैं।
वैश्विक तनाव और युद्ध की खबरों के बीच तेल कंपनियों ने भी मानो राहत की सांस लेते हुए कहा होगा — “चलो, अब दाम बढ़ाने का एक और शानदार कारण मिल गया।” उधर आम जनता पेट्रोल पंप पर खड़ी होकर मीटर की रफ्तार ऐसे देख रही है जैसे कोई रॉकेट लॉन्च हो रहा हो।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर हालात ऐसे ही रहे तो जल्द ही पेट्रोल भरवाना भी एक “लक्जरी अनुभव” बन सकता है। संभव है कि आने वाले समय में पेट्रोल पंपों पर बोर्ड लग जाए —
“पेट्रोल भरवाने वालों के लिए अलग VIP लाइन।”
आम लोगों ने भी हालात को समझते हुए अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है। कुछ लोग साइकिल निकालने की सोच रहे हैं, तो कुछ ने पैदल चलने को ही ‘फिटनेस मिशन’ का नाम दे दिया है। सोशल मीडिया पर मजाक चल रहा है कि अगर तेल के दाम ऐसे ही बढ़ते रहे तो अगली पीढ़ी पूछेगी —
“पापा, क्या सच में लोग कभी बाइक में पूरा टैंक भरवाते थे?”
उधर सरकारें और विशेषज्ञ लगातार हालात पर नजर रखने की बात कह रहे हैं, जबकि जनता पेट्रोल पंप की कीमतों पर। फिलहाल इतना तय है कि दुनिया में युद्ध का धुआं उठता है, तो उसकी गर्मी सीधे आम आदमी की जेब तक पहुंचती है।
युद्ध से तेल की कीमतों में आग, 2022 के बाद पहली बार 100 डॉलर के पार — जनता बोली: गाड़ी नहीं, अब पैदल ही सही!
