दर्पण 24 न्यूज़ दिनेश कुमार संपादक
कटनी जिले की Katni के Kailwara Khurd ग्राम पंचायत से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों को मिलने वाले मध्यान भोजन की गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
मामला उस योजना से जुड़ा है जिसे बच्चों के पोषण और शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए शुरू किया गया था — Midday Meal Scheme। लेकिन आरोप है कि इस योजना का लाभ बच्चों से ज्यादा “कागज़ों” को मिल रहा है।
बच्चों की थाली में स्वाद कम, शिकायतें ज्यादा
ग्रामीणों के अनुसार झुरही स्कूल, कैलवारा खुर्द आंगनवाड़ी और टिकरिया आदिवासी मोहल्ला में संचालित आंगनवाड़ी व स्कूलों में बच्चों को मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता बेहद खराब है। कहा जा रहा है कि भोजन में न तो पोषण का ध्यान रखा जा रहा है और न ही तय मानकों का पालन हो रहा है।
ग्रामीणों का तंज भरा कहना है कि कागजों में बच्चों को पौष्टिक भोजन मिल रहा है, लेकिन जमीन पर कभी-कभी ऐसा लगता है जैसे “मेन्यू में पोषण और थाली में समझौता” परोसा जा रहा हो।
अनाज बच्चों के लिए या बाजार के लिए?
सूत्रों के हवाले से यह भी आरोप सामने आया है कि मध्यान भोजन के लिए सरकार द्वारा भेजा जाने वाला पूरा अनाज बच्चों तक नहीं पहुंच रहा। चर्चा है कि गल्ले का कुछ हिस्सा रास्ते में ही “गायब” हो जाता है और बाजार का रास्ता पकड़ लेता है।
अगर ये आरोप सही हैं तो सवाल यह उठता है कि बच्चों की थाली से अनाज आखिर किसकी थाली में पहुंच रहा है।
शिकायतें पुरानी, कार्रवाई नई कब?
ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या नई नहीं है। लंबे समय से मध्यान भोजन को लेकर शिकायतें मिलती रही हैं, लेकिन अब तक जिम्मेदार अधिकारियों की नजर शायद किसी और फाइल पर टिकी हुई है।
सामने आने से डरते हैं ग्रामीण
ग्रामीणों का कहना है कि वे खुलकर शिकायत करने से डरते हैं। इसलिए उन्होंने मीडिया के माध्यम से प्रशासन तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश की है।
जांच की मांग
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि इन तीनों स्थानों पर संचालित मध्यान भोजन समूहों की तत्काल जांच कराई जाए। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित समूहों को हटाकर नई व्यवस्था लागू की जाए, ताकि बच्चों को सही और पौष्टिक भोजन मिल सके।
अब प्रशासन की बारी
अब देखना यह होगा कि बच्चों के पोषण से जुड़े इस गंभीर मामले पर प्रशासन कितनी जल्दी संज्ञान लेता है। क्योंकि सरकारी योजनाएं तभी सफल मानी जाएंगी जब कागजों की फाइलों से निकलकर बच्चों की थाली तक सही तरीके से पहुंचेंगी।
(दर्पण 24 न्यूज़) – क्योंकि बच्चों की थाली में राजनीति नहीं, पोषण होना चाहिए।
बच्चों की थाली में पोषण या लापरवाही? कैलवारा खुर्द में मध्यान भोजन पर उठे सवाल
