दर्पन 24 न्यूज़ संपादक दिनेश कुमार
भोपाल। देश इस समय “अमृतकाल” में प्रवेश कर चुका है और इसी अमृतकाल का एक ताज़ा और अनोखा अनुभव यात्रियों को Bhopal Junction Railway Station के AC वेटिंग रूम में मिल रहा है। यहां यात्रियों को “एसी रूम” का सुख तो मिलता है, लेकिन एसी के बजाय पंखों की फड़फड़ाती हवा से ही काम चलाना पड़ता है।
सूत्रों के अनुसार, इस “विशेष सुविधा” का लाभ लेने के लिए यात्रियों से 20 रुपये प्रति व्यक्ति प्रति घंटा शुल्क लिया जा रहा है। यानी अगर आप अमृतकाल की इस ठंडी हवा का अनुभव करना चाहते हैं, तो जेब हल्की करना अनिवार्य है।

सोफे पर बैठना भी रिस्की, 500 रुपये का फाइन तैयार
यात्रियों का कहना है कि अगर कोई थका हुआ मुसाफिर खाली पड़े सोफे पर गलती से कमर सीधी कर ले, तो यह भी महंगा पड़ सकता है। बताया जा रहा है कि “नियमों” के तहत ऐसा करने पर 500 रुपये तक का फाइन भी लग सकता है।

यानि यहां आराम से बैठने से पहले यह सोचना पड़ता है कि कमर सीधी करें या जेब।
AC रूम में पंखों की ‘एडवांस कूलिंग टेक्नोलॉजी’
रेलवे के इस आधुनिक इंतजाम में एसी का नाम तो है, लेकिन असली ठंडक पंखों के भरोसे है। एसी मशीनें शायद “अमृतकालीन ध्यान” में लीन हैं, जबकि पंखे पूरी जिम्मेदारी से फड़फड़ाते हुए सेवा दे रहे हैं।
उधर स्वच्छता का हाल यह है कि डस्टबिन खुद “उबलता” हुआ नजर आता है, जिससे यात्रियों को स्वच्छता मिशन की याद बार-बार दिलाई जाती है।
बाहर का खाना भी मना

अगर कोई यात्री बाहर से लाया हुआ भोजन खाना चाहे तो यहां उसकी भी अनुमति नहीं है। यानी इंतजार भी कीजिए, पैसे भी दीजिए और नियम भी मानिए।
सवाल वही – किस बात के पैसे?

यात्रियों का सवाल सीधा है —
जब ट्रेन से उतरकर अगली ट्रेन का इंतजार प्लेटफॉर्म पर ही करना है, एसी चल नहीं रहा, सफाई है नहीं, तो आखिर किस बात के पैसे?
व्यंग्य में लोग यह भी कह रहे हैं कि निजीकरण का उद्देश्य व्यवस्था सुधारना बताया जाता है, लेकिन अगर व्यवस्था वही पुरानी रहे और सिर्फ शुल्क नए लग जाएं, तो इसे सुधार कहें या “अमृतकालीन वसूली”?
फिलहाल भोपाल स्टेशन का यह AC वेटिंग रूम यात्रियों को एक नई सीख जरूर दे रहा है —
अमृतकाल में ठंडी हवा मुफ्त नहीं, बल्कि प्रति घंटा 20 रुपये में मिलती है… चाहे वह पंखे की ही क्यों न हो।
