“रोज़ा इफ्तार की सूचना या रील का धमाका?” – रायसेन किले की तोप ने मचा दिया डिजिटल हंगामा

दर्पण 24 न्यूज़ सम्पादक दिनेश कुमार 
Raisen Fort के ऐतिहासिक किले में इस बार रोज़ा इफ्तार की सूचना देने के लिए चली तोप ने सिर्फ आवाज़ ही नहीं की, बल्कि सोशल मीडिया की दुनिया में भी ऐसा धमाका किया कि मामला सीधे पुलिस और राजनीति तक पहुंच गया।
दरअसल, चार युवकों ने किले की प्राचीर से देसी तोप दागते हुए एक वीडियो बनाया। बताया गया कि यह वीडियो रमज़ान के दौरान इफ्तार की सूचना देने की “परंपरा” को दिखाने के लिए बनाया गया था। लेकिन जैसे ही यह वीडियो इंस्टाग्राम पर रील बनकर वायरल हुआ, परंपरा और कानून के बीच बहस की नई तोप चल गई।
मामला इतना गरमाया कि National Human Rights Commission के सदस्य Priyank Kanoongo ने सोशल मीडिया पर कड़ी नाराज़गी जताते हुए लिखा कि ASI द्वारा संरक्षित किले से रिहायशी इलाके के ऊपर अवैध तोप चलाना गंभीर मामला है और इसमें गैर-कानूनी हथियार, गोला-बारूद और दहशत फैलाने की धाराओं में कार्रवाई होनी चाहिए।
बस फिर क्या था — जो चीज़ पहले “इफ्तार की सूचना” थी, वह अचानक “कानूनी नोटिस की सूचना” बन गई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि रायसेन में रमज़ान के दौरान इफ्तार के समय तोप चलाने की पुरानी परंपरा रही है। लेकिन सोशल मीडिया के इस युग में शायद परंपराओं को भी पहले “रील एडिटिंग” और “कानूनी एडवाइजरी” से गुजरना पड़ेगा।
वहीं आपत्ति जताने वालों का कहना है कि परंपरा के नाम पर अगर ऐतिहासिक धरोहर से देसी तोप दागी जाएगी तो सुरक्षा और कानून दोनों की परीक्षा होगी।
इधर पुलिस ने भी “रील की रफ्तार” से तेज़ी दिखाते हुए शादाब कुरैशी, युसुफ शेख, वसीम और सलमान कुरैशी को गिरफ्तार कर लिया है।
अब हाल यह है कि किले की तोप से कम, लेकिन सोशल मीडिया और बयानबाज़ी की तोपें ज्यादा गरज रही हैं।
कुल मिलाकर सबक यही है —
आज के दौर में अगर परंपरा निभानी है, तो पहले यह देख लेना चाहिए कि कहीं वह “इतिहास” से ज्यादा “हैशटैग” तो नहीं बन जाएगी। 🎭
— दर्पण 24 न्यूज़

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