दर्पण 24 न्यूज भोपाल।दिनेश कुमार
मध्य प्रदेश की राजधानी क्षेत्र में एक किसान ने पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर आधुनिक बागवानी का ऐसा उदाहरण पेश किया है, जो अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन गया है। भोपाल जिले के फन्दा क्षेत्र के ग्राम बरखेड़ा बोंदर के किसान रामसिंह कुशवाह अब ऑटोमेशन सिस्टम के जरिए फूलों की खेती कर प्रतिमाह अच्छी आमदनी प्राप्त कर रहे हैं।
कभी धान, गेहूं और सोयाबीन जैसी पारंपरिक फसलों पर निर्भर रहने वाले रामसिंह कुशवाह को खेती से सीमित लाभ मिलता था। बढ़ती लागत और कम मुनाफे के कारण आर्थिक चुनौतियां सामने आ रही थीं। इसी दौरान उन्हें उद्यानिकी विभाग की एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजना के बारे में जानकारी मिली, जिसके बाद उन्होंने आधुनिक तकनीक से खेती करने का निर्णय लिया।

योजना का लाभ लेते हुए कुशवाह ने सबसे पहले एक हजार वर्गफुट क्षेत्र में पॉलीहाउस बनाकर गुलाब और जरबेरा जैसे फूलों की खेती शुरू की। इसके बाद वर्ष 2023-24 में उन्होंने एक एकड़ भूमि में पॉलीहाउस स्थापित कर करीब 30 हजार पौधे (गुलाब, जरबेरा और गेंदा) लगाए।
आज उनकी खेती से रोजाना लगभग 4 हजार कट फ्लावर बाजार में भेजे जा रहे हैं, जिससे उन्हें प्रतिदिन करीब 4 से 6 हजार रुपये तक की आमदनी हो रही है। उनके फूलों की सप्लाई अब लखनऊ, दिल्ली और जयपुर जैसे बड़े शहरों तक पहुंच रही है।

उत्पादन बढ़ाने और लागत कम करने के लिए रामसिंह कुशवाह ने इस वर्ष अपने पॉलीहाउस में सेंसर आधारित ऑटोमेशन सिस्टम भी स्थापित कराया है। इस सिस्टम की कुल लागत लगभग 4 लाख रुपये है, जिसमें से 2 लाख रुपये की सब्सिडी उन्हें सरकार से मिली है।
इस ऑटोमेशन सिस्टम की मदद से एक एकड़ क्षेत्र में पानी, खाद और दवाइयों की संतुलित मात्रा 24×7 स्वचालित रूप से पौधों तक पहुंचाई जा रही है। इससे श्रम, समय और लागत तीनों की बचत हो रही है। इस तकनीक को अपनाने के साथ ही रामसिंह कुशवाह ऑटोमेटिक सिस्टम से बागवानी करने वाले भोपाल जिले के पहले किसान बन गए हैं।
कुशवाह बताते हैं कि आधुनिक तकनीक और सरकारी योजनाओं की मदद से खेती को लाभकारी बनाया जा सकता है। उन्होंने प्रधानमंत्री Narendra Modi और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री Mohan Yadav का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार की योजनाओं ने किसानों को आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया है।
रामसिंह कुशवाह की यह सफलता प्रदेश के किसानों के लिए एक संदेश है कि यदि खेती में नई तकनीक, वैज्ञानिक तरीका और सरकारी योजनाओं का सही उपयोग किया जाए तो पारंपरिक खेती को भी लाभकारी व्यवसाय में बदला जा सकता है।
