दमोह में इंसानियत का पोस्टमार्टम: ‘सिरफिरे’ की हैवानियत ने समाज को आईना दिखाया

मध्यप्रदेश के दमोह जिले के देहात थाना क्षेत्र के समन्ना गांव में गुरुवार दोपहर जो हुआ, उसने सिर्फ एक किशोर की जान ही नहीं ली, बल्कि इंसानियत की भी खुलेआम हत्या कर दी। घटना इतनी वीभत्स है कि सुनकर ही रूह कांप जाए, लेकिन शायद हमारे समाज की संवेदनाएं अब इतनी मजबूत हो चुकी हैं कि ऐसी खबरें भी “एक और क्राइम न्यूज” बनकर रह जाती हैं।

बताया जा रहा है कि इमलिया चौकी क्षेत्र के अर्थखेड़ा गांव का 16 वर्षीय भरत विश्वकर्मा अपनी बहन तमन्ना के घर भाईदूज का टीका लगवाने समन्ना गांव आया था। परंपरा निभाने आया भाई शायद यह नहीं जानता था कि इस बार बहन का टीका उसके लिए आशीर्वाद नहीं, बल्कि अंतिम विदाई का प्रतीक बन जाएगा।

टीका लगवाने के बाद जब भरत बाइक से वापस लौट रहा था, तभी गांव के ही एक कथित सिरफिरे आरोपी गुड्डा पटैल ने उस पर हमला कर दिया। पहले लोहे की रॉड से सिर पर वार किया गया, जिससे वह जमीन पर गिर पड़ा। इसके बाद आरोपी ने मानो किसी फिल्मी खलनायक की स्क्रिप्ट पढ़ ली हो—पास से हथौड़ा लाकर उसके सिर पर लगातार वार किए।

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। आरोप है कि हत्या के बाद आरोपी ने ऐसी वीभत्स हरकत की, जिसे सुनकर सभ्य समाज का सिर शर्म से झुक जाए—मृतक के शरीर से मांस निकालकर खाने और खून पीने जैसी अमानवीय हरकत।

अब गांव में दहशत है, आक्रोश है, लोग स्तब्ध हैं। पुलिस जांच में जुटी है, आरोपी गिरफ्तार होगा, केस चलेगा, तारीखें पड़ेंगी… और कुछ साल बाद शायद यह घटना भी फाइलों में धूल खाती एक और कहानी बन जाएगी।

व्यंग्य यही है कि हम तकनीक, विकास और आधुनिकता के दौर में चांद पर जाने की बात करते हैं, लेकिन जमीन पर इंसानियत अब भी पत्थर युग से बाहर निकलने की कोशिश कर रही है।

फिलहाल सवाल वही पुराना है—क्या समाज में ऐसे “सिरफिरे” अचानक पैदा हो जाते हैं, या फिर हम सब मिलकर धीरे-धीरे उन्हें बनने देते हैं

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *