सिलेंडरों की सैर और सिस्टम की रफ्तार – कटनी में ‘उड़न’ ट्रक का कारनामा कटनी जिले के बिलहरी क्षेत्र के घूघरा की घटना
कटनी जिले के बिलहरी चौकी क्षेत्र के ग्राम घुघरा के पास दोपहर का सन्नाटा उस वक्त टूट गया, जब घरेलू गैस सिलेंडरों से लदा एक ट्रक अपनी रफ्तार से खुद ही प्रभावित होकर सड़क किनारे जा पलटा। गनीमत रही कि सिलेंडरों ने भी उस दिन “संयम दिवस” मना रखा था—न कोई विस्फोट, न कोई रिसाव। वरना खबर की हेडलाइन कुछ और ही होती।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक ट्रक इतनी तेज भाग रहा था मानो उसे कहीं ‘इमरजेंसी डिलीवरी’ देनी हो। अचानक वाहन डगमगाया और चालक का नियंत्रण ऐसा छूटा जैसे चुनावी वादों पर नियंत्रण छूटता है। देखते ही देखते ट्रक सड़क से नीचे उतर गया और दर्जनों सिलेंडर सड़क पर ऐसे बिखर गए मानो किसी ने लोहे की होली खेल दी हो।
मंजर भयावह जरूर था, पर किस्मत मेहरबान रही। आसपास के ग्रामीण और राहगीर पहले तो सहमे, फिर मोबाइल कैमरे संभाल लिए—क्योंकि आजकल हादसे से पहले कवरेज जरूरी है। कुछ लोग दूरी बनाकर खड़े रहे, तो कुछ ने विशेषज्ञ की तरह सलाह देना शुरू कर दिया—“अरे दूर रहो, कहीं फट न जाए!”
भीड़ इतनी जुटी कि लगा मानो कोई मेला लग गया हो। फर्क बस इतना था कि यहां झूले नहीं, सिलेंडर लुढ़क रहे थे। प्रशासन के आने तक लोग दहशत और जिज्ञासा के बीच झूलते रहे। हर चेहरे पर एक ही सवाल—“आज तो बच गए, कल क्या होगा?”
हादसा भले टल गया हो, लेकिन सवाल अपनी जगह कायम है—क्या सड़कों पर रफ्तार ही सबसे बड़ी उपलब्धि बन गई है? और क्या सुरक्षा इंतजाम सिर्फ कागजों तक सीमित हैं?
फिलहाल, कटनी ने राहत की सांस ली है। सिलेंडरों ने भी साबित कर दिया कि वे सिर्फ रसोई में ही नहीं, सड़क पर भी ‘धैर्य’ रख सकते हैं। वरना एक चिंगारी, और कहानी कुछ और ही होती।
दर्पण 24 न्यूज – खबर वही, नजर नई।