उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से सामाजिक सौहार्द और आपसी भाईचारे की एक प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है। यहां एक मुस्लिम महिला उजमा खान ने अपनी शादी की मन्नत पूरी होने पर कांवड़ यात्रा शुरू की है।

उजमा खान 14 फरवरी से कांवड़ लेकर भोला भाईपुर गांव स्थित गंगा महादेव मंदिर में जलाभिषेक करने के लिए निकली हैं। उनका कहना है कि उन्होंने मनोकामना पूरी होने पर भगवान शिव को गंगाजल अर्पित करने का संकल्प लिया था, जिसे अब वे श्रद्धा और आस्था के साथ पूरा कर रही हैं।
आस्था ने जोड़ी दिलों की डोर
कांवड़ यात्रा आमतौर पर सावन मास में बड़े स्तर पर आयोजित होती है, लेकिन उजमा खान की यह यात्रा विशेष इसलिए है क्योंकि यह सामाजिक सौहार्द और धार्मिक सहिष्णुता का प्रतीक बनकर सामने आई है। स्थानीय लोगों ने भी उनके इस कदम की सराहना की और इसे गंगा-जमुनी तहजीब की सजीव मिसाल बताया।
यात्रा के दौरान कई हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोगों ने उनका उत्साहवर्धन किया। ग्रामीणों का कहना है कि आस्था का कोई धर्म नहीं होता, और इंसानियत सबसे बड़ा धर्म है।
समाज के लिए सकारात्मक संदेश
उजमा खान ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्होंने अपनी शादी के सफल और सुखद होने की मन्नत मांगी थी। मनोकामना पूरी होने के बाद उन्होंने गंगाजल चढ़ाने का प्रण लिया था। उनका कहना है कि यह कदम किसी दिखावे के लिए नहीं, बल्कि उनकी व्यक्तिगत आस्था और विश्वास का हिस्सा है।
इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि भारत की विविधता में एकता की परंपरा आज भी जीवंत है। जहां एक ओर देश में धार्मिक मतभेदों को लेकर बहसें होती रहती हैं, वहीं बुलंदशहर की यह तस्वीर समाज को सकारात्मक संदेश दे रही है।
भाईचारे की मिसाल बनी कांवड़ यात्रा
स्थानीय प्रशासन ने भी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की है ताकि यात्रा शांतिपूर्ण ढंग से पूरी हो सके। क्षेत्र के लोगों का मानना है कि ऐसे उदाहरण समाज में सौहार्द, प्रेम और आपसी सम्मान को बढ़ावा देते हैं।
बुलंदशहर की यह घटना केवल एक कांवड़ यात्रा नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और पारस्परिक सम्मान का संदेश है, जो बताती है कि आस्था की राह पर चलते हुए इंसानियत सबसे ऊपर है।
दर्पण 24 न्यूज़ इस सकारात्मक पहल का स्वागत करता है और उम्मीद करता है कि ऐसे उदाहरण समाज में सद्भाव और भाईचारे की भावना को और मजबूत करेंगे।
