कटनी/भोपाल। शहर एवं ग्रामीण क्षेत्रों में कुत्ते, बंदर, बिल्ली सहित अन्य जानवरों के काटने और खरोंचने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जानवर के काटने के बाद हर एक क्षण कीमती होता है, क्योंकि समय पर उपचार न मिलने पर रैबीज (हाइड्रोफोबिया) जैसी जानलेवा बीमारी का खतरा बढ़ जाता है।
डॉक्टरों के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति को जानवर काट ले या खरोंच दे, तो सबसे पहले घाव को तुरंत साफ बहते पानी और साबुन से कम से कम 10 से 15 मिनट तक अच्छी तरह धोना चाहिए। इसके बाद नजदीकी शासकीय या निजी अस्पताल में जाकर एंटी-रैबीज वैक्सीन और आवश्यकता अनुसार इंजेक्शन अवश्य लगवाना चाहिए।
विशेषज्ञों ने यह भी स्पष्ट किया है कि मामूली खरोंच या हल्की चोट को नजरअंदाज करना बड़ी भूल हो सकती है। कई बार छोटे घाव से भी संक्रमण शरीर में प्रवेश कर जाता है। बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
स्वास्थ्य विभाग ने आमजन से अपील की है कि किसी भी प्रकार की घरेलू उपचार पद्धति या झाड़-फूंक के चक्कर में न पड़ें, बल्कि तत्काल चिकित्सकीय सहायता लें। समय पर सही इलाज ही जीवन बचाने का सबसे सुरक्षित उपाय है।
दर्पण 24 न्यूज सभी पाठकों से अपील करता है कि जागरूक रहें, सतर्क रहें और किसी भी जानवर के काटने या खरोंचने की घटना को हल्के में न लें।
