“घोटाला गया, आंसू आ गए!” — राऊज एवेन्यू कोर्ट से केजरीवाल-सिसोदिया को राहत, राजनीति में फिर ‘इमोशनल अटैक’

नई दिल्ली। दिल्ली की बहुचर्चित शराब नीति मामले में बड़ा मोड़ तब आया जब राऊज एवेन्यू कोर्ट ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को बड़ी राहत देते हुए बरी कर दिया। फैसले के बाद अदालत के बाहर का दृश्य किसी राजनीतिक फिल्म के क्लाइमेक्स से कम नहीं था—कैमरे ऑन, माइक आगे, और भावनाएं हाई डेफिनिशन में प्रसारित होती हुईं।

जैसे ही राहत की खबर बाहर आई, समर्थकों ने इसे “सत्य की जीत” बताया, तो विरोधियों ने कहा, “अभी तो पिक्चर बाकी है।” लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा उस पल की रही जब केजरीवाल कैमरे के सामने भावुक नजर आए। राजनीति में आंसुओं का इतिहास पुराना है—कभी संसद में, कभी प्रेस कॉन्फ्रेंस में—और अब अदालत के बाहर।

दिल्ली की तथाकथित शराब नीति को लेकर महीनों से आरोप-प्रत्यारोप की बोतलें खुलती रहीं। कभी कहा गया कि नीति में ‘स्पिरिट’ ज्यादा थी, कभी आरोप लगा कि ‘मिश्रण’ गड़बड़ है। मगर कोर्ट के फैसले ने फिलहाल इस ‘मिश्रण’ को कानूनी तौर पर साफ बता दिया।

राजनीतिक गलियारों में अब नई बहस छिड़ गई है—क्या यह न्यायिक जीत है, नैतिक जीत है या फिर आगामी चुनावों की स्क्रिप्ट का पहला सीन? आम आदमी पार्टी इसे “साजिश का अंत” बता रही है, जबकि विपक्ष का कहना है कि “कानून का चक्र अभी पूरा नहीं हुआ।”

दिल्ली की जनता भी कम कन्फ्यूज नहीं है। कुछ लोग पूछ रहे हैं—“अगर घोटाला था तो गया कहां?” और अगर नहीं था, तो इतने महीनों तक ‘हाई वोल्टेज ड्रामा’ क्यों चला?

फिलहाल, राजनीति की इस ‘हाई स्पिरिट’ कहानी में नया ट्विस्ट आ चुका है। कैमरे के सामने आए आंसू यह संकेत दे रहे हैं कि चुनावी मौसम चाहे जब आए, भावनाओं का मानसून पहले ही शुरू हो चुका है।

दर्पण 24 न्यूज — खबर में थोड़ा नमक, थोड़ा व्यंग्य, और सच्चाई का स्वाद।

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