कटनी से राजकुमारी मिश्रा की रिपोर्ट- दर्पण 24 न्यूज़

मध्यप्रदेश के कटनी जिले में रिश्वतखोरी का एक अजीब और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां निलंबन से बहाली कराने के एवज में एक बाबू द्वारा 54 हजार रुपये कीमत का मोबाइल फोन बतौर रिश्वत मांगने का मामला उजागर हुआ है। पहली किस्त के रूप में 5 हजार रुपये नगद लेते हुए आरोपी को लोकायुक्त पुलिस जबलपुर की टीम ने रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।
बहाली के बदले ‘मोबाइल डिमांड’
लोकायुक्त टीआई ब्रजमोहन नरवरिया के अनुसार, वर्ष 2023 में लोकायुक्त ट्रैप कार्रवाई में सह आरोपी रहे आशीष कुमार सोनी निलंबित चल रहे थे। बहाली के लिए वे पिछले एक वर्ष से जिला पंचायत कार्यालय के चक्कर लगा रहे थे। आरोप है कि स्थापना शाखा में पदस्थ लेखापाल सतेंद्र सोनी ने उनकी बहाली में मदद करने के एवज में करीब 50 से 54 हजार रुपये कीमत का विवो मोबाइल फोन रिश्वत के रूप में मांगा।
शिकायतकर्ता के अनुसार, आग्रह करने पर रकम किस्तों में लेने की बात तय हुई। पहली किस्त के रूप में 5 हजार रुपये देने पर सहमति बनी।
कैमिकल युक्त नोटों के साथ ट्रैप
शिकायत मिलने पर लोकायुक्त की 5 सदस्यीय टीम ने योजना बनाकर ट्रैप कार्रवाई की। पांच सौ रुपये के 10 कैमिकल युक्त नोट—कुल 5 हजार रुपये—जैसे ही आरोपी ने स्वीकार किए, टीम ने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया। आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत प्रकरण दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी फाइल अटकी
शिकायतकर्ता आशीष दुबे ने बताया कि वे वर्ष 2023 के एक प्रकरण में सह आरोपी होने के कारण निलंबित थे। राहत के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी, जिस पर वर्ष 2025 में कार्रवाई के आदेश जारी हुए। इसके बावजूद फाइल आगे बढ़ाने के लिए स्थापना शाखा के बाबू द्वारा मोबाइल फोन की मांग की जा रही थी।
जांच जारी
लोकायुक्त टीम द्वारा आवश्यक दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी की जा रही है। मामले में आगे और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
यह घटना एक बार फिर शासकीय कार्यालयों में पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता को रेखांकित करती है।
