“योगीजी बताइए… थप्पड़ मारूं या न्याय का इंतज़ार करूं?” — सिस्टम से परेशान पीड़िता, प्रशासन खोज रहा ‘इमेज मैनेजमेंट

दर्पण 24 न्यूज़ । उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से आई एक घटना ने कानून-व्यवस्था, सुरक्षा और सरकारी दावों की पोल ऐसे खोल दी जैसे किसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में माइक ऑन रह जाए। नगालैंड की एक डॉक्टर ने आरोप लगाया कि कुछ मनचलों ने उनका पीछा किया, गालियां दीं और उनके साथ अभद्रता की हदें पार कर दीं। परेशान होकर उन्होंने सीधा सवाल सत्ता से पूछ लिया — “योगी आदित्यनाथ जी बताएं, क्या मैं उन तीनों को थप्पड़ मार पाऊंगी?”

सूत्रों के अनुसार, घटना के बाद प्रशासन की प्राथमिकता अपराधियों को पकड़ना कम और बयान जारी करना ज्यादा दिखी। अधिकारियों ने बताया कि जांच जारी है, टीमें गठित हैं, कार्रवाई होगी — यानी वही सरकारी प्लेलिस्ट, जो हर घटना के बाद ऑटो-प्ले हो जाती है।

इधर जनता सोशल मीडिया पर पूछ रही है कि “बुलडोजर” सिर्फ पोस्टर में चलता है या कभी-कभी सड़क पर भी आएगा? वहीं कुछ लोगों का कहना है कि अगर पीड़िता खुद थप्पड़ मार दे तो शायद केस की स्पीड 5G हो जाए, क्योंकि तब मामला “लॉ एंड ऑर्डर चैलेंज” बन जाएगा।

उत्तर प्रदेश पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि आरोपियों को जल्द पकड़ा जाएगा। हालांकि जनता का अनुभव कहता है कि “जल्द” शब्द का सरकारी कैलेंडर अलग होता है — जिसमें तारीखें नहीं, आश्वासन छपे होते हैं।

दर्पण 24 न्यूज़ की व्यंग्यात्मक टिप्पणी:
देश में महिलाओं की सुरक्षा पर भाषण देना आसान है, लेकिन सड़क पर सुरक्षा देना थोड़ा कठिन काम है। शायद इसलिए सिस्टम भी कन्फ्यूज है — भाषण पहले दे या सुरक्षा पहले दे।

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