नगर निगम में ‘फाइलों का फिटनेस टेस्ट’! पारदर्शिता की तलाश में जनता

कटनी से राजकुमारी मिश्रा की रिपोर्ट 

कटनी। शहर में इन दिनों विकास कार्यों से ज्यादा चर्चा “विकास की प्रक्रिया” की हो रही है। नगर निगम की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठ रहे हैं, और चाय की दुकानों से लेकर चांडक चौक तक एक ही जिज्ञासा तैर रही है—आख़िर फाइलें चलती कैसे हैं?

नगर निगम की महापौर प्रीति संजीव सूरी के कार्यकाल में कई विकास कार्य जारी हैं, लेकिन कुछ स्थानीय नागरिकों का कहना है कि चुनावी मौसम में जो वादों की फुहार थी, अब वह कागज़ी बादलों में बदल गई है। आरोप यह भी हैं कि चुनाव के दौरान सक्रिय रहे एक “प्रभावशाली सज्जन” अब भी फाइलों की सेहत पर नज़र रखे हुए हैं—कहीं ऐसा तो नहीं कि हर फाइल को आगे बढ़ने से पहले अनौपचारिक “फिटनेस टेस्ट” देना पड़ रहा हो?

🚛 कचरा गाड़ियां और ‘क्लासिक रेट

कचरा वाहनों की खरीद को लेकर शहर में गणित के नए-नए फार्मूले निकाले जा रहे हैं। आम नागरिक पूछ रहे हैं—क्या इन गाड़ियों में कचरे के साथ-साथ महंगाई भी उठाई जा रही है? हालांकि आधिकारिक तौर पर कुछ भी सिद्ध नहीं हुआ है, पर सवालों का कचरा रोज़ बढ़ रहा है।

🛣️ सीसी रोड पर डामर का ‘मेकअप’

शहर में कुछ जगहों पर सीसी रोड के ऊपर डामर बिछाने की चर्चा है। लोग मज़ाक में कह रहे हैं—“सड़कें भी अब ब्यूटी पार्लर जाने लगी हैं।” वहीं सिविल लाइन क्षेत्र में सड़क निर्माण के बाद दोबारा खुदाई ने नागरिकों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि विकास कार्यों में ‘रिटेक’ का ट्रेंड तो नहीं चल पड़ा?

🚧 चौड़ीकरण में चयन का विज्ञान

चांडक चौक से घंटाघर रोड तक अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर भी कानाफूसी जारी है। कुछ लोग कह रहे हैं कि कार्रवाई में “समानता” की जगह “परिचयता” ज्यादा दिखी। हालांकि प्रशासन की ओर से इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई है।

🌊 नाले की नई कहानी

आदर्श कॉलोनी मोड़ क्षेत्र में नाला निर्माण को लेकर भी सवाल हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि पुराने नाले की दिशा और संरचना में बदलाव से भविष्य में जल निकासी की समस्या हो सकती है। शर्मा वेल्डिंग के पास तो नाले का “भौगोलिक पुनर्गठन” चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग पूछ रहे हैं—“नाला वहीं है या कहीं और शिफ्ट हो गया?”

इन तमाम चर्चाओं और आरोपों के बीच सच्चाई की आधिकारिक मुहर अभी लगना बाकी है। लेकिन शहरवासियों की एक ही मांग है—विकास कार्य हों, जरूर हों, पर ऐसे हों कि दोबारा खुदाई से ज्यादा खुद-ब-खुद भरोसा उभरे।

कटनी की जनता फिलहाल यही चाहती है कि फाइलें भी पारदर्शी हों, सड़कें भी टिकाऊ हों और नाले भी अपने रास्ते पर अडिग रहें—ताकि विकास की कहानी में व्यंग्य की जरूरत ही न पड़े।

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