देश की राजनीति में इस समय विरोध-प्रदर्शन का मौसम पूरे शबाब पर है। कहीं AI समिट के बाहर प्रदर्शन हो रहे हैं तो कहीं सड़कों पर राजनीतिक दल आमने-सामने हैं। इसी बीच पुलिस की एक टिप्पणी ने सियासी बहस को और दिलचस्प बना दिया। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि AI समिट के दौरान हुआ प्रदर्शन शैली और ऊर्जा के मामले में नेपाल के हालिया Gen-Z आंदोलनों जैसा लग रहा था—फर्क बस इतना था कि यहां पोस्टर हिंदी-अंग्रेजी में थे और वहां नेपाली में।
उधर भारतीय जनता पार्टी ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के खिलाफ देशभर में प्रदर्शन छेड़ दिया। भाजपा नेताओं का कहना है कि कांग्रेस की नीतियों से देश का नुकसान हो रहा है, जबकि कांग्रेस नेताओं का पलटवार है कि भाजपा को चुनाव के अलावा कुछ दिखाई ही नहीं देता। राजनीतिक विश्लेषक मजाक में कह रहे हैं कि “देश में मौसम तीन ही होते हैं—गर्मी, बारिश और प्रदर्शन।”
महाराष्ट्र में राहुल को काले झंडे
सबसे ज्यादा राजनीतिक गर्मी महाराष्ट्र में देखने को मिली, जहां कांग्रेस नेता राहुल गांधी के दौरे के दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने काले झंडे दिखाए। भाजपा समर्थकों ने इसे जनता का गुस्सा बताया, जबकि कांग्रेस नेताओं ने इसे “प्रायोजित विरोध” करार दिया। स्थानीय लोगों का कहना था कि उन्हें तो बस इतना पता चला कि “आज शहर में कोई बड़ा नेता आ रहा है, इसलिए ट्रैफिक जाम रहेगा।”
पुलिस की तुलना बनी चर्चा का विषय
AI समिट के दौरान हुए विरोध प्रदर्शन पर पुलिस की “नेपाल Gen-Z” वाली तुलना सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। कुछ लोगों ने इसे पुलिस का हास्यबोध बताया, तो कुछ ने कहा कि अब आंदोलन भी इंटरनेशनल स्टैंडर्ड पर होने लगे हैं। एक यूजर ने लिखा—“जब तक आंदोलन ट्रेंडिंग में न आए, तब तक आंदोलन कैसा?”
सियासत का नया ट्रेंड
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि आने वाले समय में विरोध-प्रदर्शन और डिजिटल कैंपेन साथ-साथ चलेंगे—एक तरफ सड़क पर नारे, दूसरी तरफ सोशल मीडिया पर हैशटैग। जनता भी अब समझदार हो गई है, वह जानती है कि चुनाव नजदीक आते ही नेताओं को जनता की याद ज्यादा आने लगती है।
फिलहाल देश में राजनीतिक माहौल गरम है, और ऐसा लग रहा है कि आने वाले दिनों में आरोप-प्रत्यारोप का यह सिलसिला और तेज होगा। जनता इंतजार कर रही है कि प्रदर्शन खत्म होने के बाद असली मुद्दों पर भी उतनी ही ऊर्जा दिखाई जाएगी या नहीं।
दर्पण 24 न्यूज़
