राजस्थान में गोवंश संरक्षण और ग्रामीण व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से एक नई पहल शुरू की जा रही है, जिसके तहत गांवों में गाय चराने का कार्य करने वाले व्यक्तियों (गोपালकों) को हर महीने सैलरी दी जाएगी। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य आवारा पशुओं की समस्या को कम करना, किसानों की फसलों को नुकसान से बचाना और गोवंश की बेहतर देखभाल सुनिश्चित करना है।
जानकारी के अनुसार योजना के तहत गांव के सभी गोवंश को एक निर्धारित समय पर एकत्रित कर गोचर भूमि (चरागाह) पर ले जाया जाएगा, जहां पूरे दिन उनकी देखभाल और चराई कराई जाएगी। शाम के समय सभी पशुओं को सुरक्षित रूप से उनके मालिकों के पास वापस छोड़ दिया जाएगा। इस कार्य के लिए नियुक्त गोपालकों को सरकार या पंचायत स्तर पर मानदेय दिया जाएगा।
कितनी मिलेगी सैलरी
योजना के प्रारंभिक प्रस्ताव के अनुसार गोपालकों को लगभग ₹10,000 प्रति माह मानदेय दिए जाने की व्यवस्था की जा रही है। कुछ स्थानों पर यह राशि स्थानीय निकाय, पशुओं की संख्या और कार्य व्यवस्था के आधार पर थोड़ी कम या ज्यादा भी हो सकती है।
योजना के फायदे
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आवारा पशुओं की समस्या में कमी
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किसानों की फसल सुरक्षा
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गोवंश का नियमित भोजन और देखभाल
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ग्रामीणों के लिए रोजगार के अवसर
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सामूहिक जिम्मेदारी की भावना विकसित होना
सरकार का मानना है कि इस पहल से ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन व्यवस्था अधिक संगठित होगी और गोवंश संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।
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