ढीमरखेड़ा जनपद पंचायत क्षेत्र में चल रहे निर्माण कार्यों को लेकर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं। पंचायत स्तर पर स्वीकृत विकास कार्यों की फाइलें आगे बढ़ाने के एवज में सरपंचों और सचिवों से 15 से 20 प्रतिशत तक कमीशन मांगे जाने का आरोप लगाया गया है। इन आरोपों के बाद पूरे जनपद में प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है।
स्थानीय ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि कथित लेन-देन के बिना न तो तकनीकी स्वीकृति मिल रही है और न ही भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ पा रही है। इससे पंचायत प्रतिनिधियों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है और गांवों में चल रहे विकास कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।
अधिकारियों पर सीधे आरोप
सूत्रों के अनुसार, ढीमरखेड़ा एसडीओ अजय केसरवानी एवं उपयंत्री मनीष हल्लेकर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि उनके कार्यालयों से बिना समझौते के कोई भी फाइल आगे नहीं बढ़ती। हालांकि, इस पूरे मामले में अब तक संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
विकास कार्यों पर असर
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत भवन, सीसी सड़क, नाली निर्माण, जल संरचना जैसे आवश्यक कार्य या तो अधूरे पड़े हैं या स्वीकृति के अभाव में शुरू ही नहीं हो पा रहे हैं। इससे आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
उच्च अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग
ग्रामीणों एवं सामाजिक संगठनों ने कलेक्टर, संभागीय आयुक्त और राज्य शासन से इस पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो पंचायत स्तर पर चल रहे विकास कार्य पूरी तरह ठप हो जाएंगे और भ्रष्टाचार को खुला संरक्षण मिलता रहेगा।
अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इन गंभीर आरोपों को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या वास्तव में पंचायतों में हो रही कथित कमीशनखोरी पर लगाम लग पाती है या नहीं।
