कबीरधाम में ‘घर वापसी महोत्सव’, 66 वनवासी बोले—अब चैन की नींद आएगी

कबीरधाम (छत्तीसगढ़)।कबीरधाम जिले में रविवार को ऐसा दृश्य देखने को मिला, जहां “बहला-फुसलाकर” ले जाए गए 66 वनवासियों ने सामूहिक रूप से घर वापसी करते हुए फिर से सनातन धर्म अपनाने का ऐलान किया। लौटे लोगों का कहना है कि अब उन्हें मानसिक शांति मिल रही है—वह शांति जो मोबाइल नेटवर्क मिलने के बाद गांव में सबसे पहले महसूस होती है।

कार्यक्रम की खास बात रही भाजपा विधायक भावना बोहरा की मौजूदगी। उन्होंने पारंपरिक भाव-भंगिमा के साथ चरण धोकर सभी का स्वागत किया। मंच से संदेश स्पष्ट था—“स्वागत है, वापसी पर चाय नाश्ता हमारी ओर से।” मौके पर मौजूद समर्थकों ने इसे ऐतिहासिक बताया, जबकि कैमरों ने हर ऐंगल से इतिहास सुरक्षित कर लिया।

घर वापसी करने वालों का कहना है कि पहले उन्हें प्रलोभन दिखाए गए थे, अब उन्हें “पहचान” दिखाई गई है। आयोजकों के मुताबिक, यह सिर्फ वापसी नहीं, बल्कि “री-कनेक्शन अपडेट” है—संस्कार 2.0।

कार्यक्रम के दौरान कुछ पोस्टर और नारों ने भी ध्यान खींचा, जिनमें शुद्धि को भविष्य की सुरक्षा का “ऑल-इन-वन प्लान” बताया गया। मंच से यह भी समझाया गया कि धार्मिक अधिकारों की सुरक्षा का गणित बहुसंख्यक से जुड़ा है—हालांकि गणित की क्लास बाद में रखी गई।

प्रशासन की ओर से कोई औपचारिक बयान नहीं आया, लेकिन सूत्रों का कहना है कि व्यवस्था शांत रही और व्यंग्य भी सीमित मात्रा में परोसा गया। सामाजिक जानकारों का मानना है कि ऐसे आयोजनों में आस्था, राजनीति और कैमरा—तीनों का संतुलन साधना सबसे बड़ी साधना होती है।

कुल मिलाकर कबीरधाम में यह कार्यक्रम आस्था, संदेश और मंच प्रबंधन का ऐसा संगम रहा, जहां हर कोई अपने-अपने अर्थ निकालकर घर लौटा—कुछ सनातन में, कुछ सुर्खियों में।

— दर्पण 24 न्यूज

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