
UGC Act 2026 के खिलाफ उतरे कवि कुमार विश्वास, सोशल मीडिया पर साझा की तीखी कविता
नई दिल्ली।
यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नए नियमों को लेकर देशभर में जारी बहस के बीच प्रसिद्ध कवि और वक्ता कुमार विश्वास ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने UGC Act 2026 का विरोध करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर एक कविता साझा की, जिसने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल मचा दी है।
कुमार विश्वास द्वारा साझा की गई यह कविता स्वर्गीय रमेश रंजन की रचना है। कविता की पंक्तियाँ—
“चाहे तिल लो या ताड़ लो राजा,
राई लो या पहाड़ लो राजा,
मैं अभागा ‘सवर्ण’ हूँ मेरा,
रौंया-रौंया उखाड़ लो राजा…”
—के माध्यम से उन्होंने नए UGC नियमों पर गहरी असहमति जाहिर की है।
इस पोस्ट के साथ कुमार विश्वास ने #UGC_RollBack हैशटैग का इस्तेमाल किया, जिससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि वे इन नियमों को वापस लिए जाने की मांग कर रहे हैं। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर समर्थन और विरोध—दोनों तरह की प्रतिक्रियाएँ देखने को मिल रही हैं।
क्या है UGC Act 2026 और नए नियम?
केंद्र सरकार ने जनवरी 2026 में यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन के नए नियम लागू किए हैं। ये नियम 13 जनवरी 2026 को अधिसूचित किए गए और 15 जनवरी 2026 से पूरे देश में प्रभावी हो गए।
सरकार के अनुसार, इन नियमों का मुख्य उद्देश्य कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में जातिगत भेदभाव को रोकना है, विशेषकर एससी, एसटी, ओबीसी और अन्य पिछड़े वर्गों के छात्रों के साथ होने वाले भेदभाव को समाप्त करना।
नए नियमों की प्रमुख विशेषताएं:
हर कॉलेज और विश्वविद्यालय में इक्विटी कमेटी का गठन अनिवार्य
इक्विटी स्क्वॉड और 24 घंटे की हेल्पलाइन की व्यवस्था
कमेटी में महिलाओं, एससी-एसटी, ओबीसी और दिव्यांगजनों का प्रतिनिधित्व अनिवार्य
भेदभाव की शिकायतों पर त्वरित जांच और कार्रवाई का प्रावधान
नियमों का पालन न करने पर UGC द्वारा मान्यता रद्द करने या फंड रोकने की कार्रवाई संभव
UGC ने स्पष्ट किया है कि ये नियम 2012 में लागू पुराने रेगुलेशंस को अपडेट और मजबूत करने के उद्देश्य से लाए गए हैं।
बढ़ता जा रहा है विरोध
हालांकि सरकार इन नियमों को समानता और समावेशन की दिशा में जरूरी कदम बता रही है, वहीं कई शिक्षाविद, सामाजिक संगठन और अब सार्वजनिक हस्तियाँ भी इन्हें एकतरफा और दुरुपयोग की आशंका वाला कानून बता रही हैं। कुमार विश्वास का यह बयान इसी बढ़ते असंतोष को दर्शाता है।
अब देखना होगा कि सरकार और UGC इस विरोध पर क्या रुख अपनाते हैं और क्या नियमों में किसी तरह के संशोधन की गुंजाइश बनती है या नहीं।