गोमूत्र–गोबर के नाम पर साढ़े 3 करोड़ का घोटाला!जबलपुर वेटरनरी यूनिवर्सिटी में पंचगव्य योजना बनी भ्रष्टाचार का जरिया जबलपुर |

भारत में अब तक सीमेंट, ड्राय फ्रूट, टेंट, फर्जी शिक्षक और पेंट जैसे अजीबो-गरीब घोटालों की लंबी फेहरिस्त सामने आ चुकी है, लेकिन मध्य प्रदेश के जबलपुर से सामने आया यह मामला सभी को पीछे छोड़ने वाला है।

👉यहाँ गाय माता के गोमूत्र और गोबर के नाम पर करीब साढ़े 3 करोड़ रुपये का ऐसा घोटाला सामने आया है, जिसने सरकारी रिसर्च योजनाओं की साख पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

👉कैंसर–टीबी के इलाज के नाम पर मांगे 8 करोड़, मिले 3.50 करोड़ साल 2011 में जबलपुर स्थित नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय ने केंद्र/राज्य सरकार से पंचगव्य योजना के तहत एक प्रस्ताव भेजा।

◽इस प्रस्ताव में दावा किया गया कि गाय के गोबर, गौमूत्र और दूध के जरिए कैंसर, टीबी जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज पर शोध किया जाएगा।

◽सरकार से 8 करोड़ रुपये की मांग की गई, लेकिन मंजूरी सिर्फ 3 करोड़ 50 लाख रुपये की मिली।

◽10 साल की रिसर्च, नतीजा शून्य

करीब 10 वर्षों तक चली कथित रिसर्च के बावजूद

◽न तो कैंसर का कोई इलाज सामने आया

◽न ही टीबी या अन्य बीमारियों को लेकर कोई वैज्ञानिक सफलता

👉रिसर्च का कोई ठोस परिणाम या मान्यताप्राप्त रिपोर्ट आज तक सामने नहीं आई।

◽सरकारी फंड से अफसरों का सैर-सपाटा

जांच में सामने आया है कि रिसर्च के नाम पर मिले साढ़े तीन करोड़ रुपये से

देशभर में मौज-मस्ती और भ्रमण किया गया।

👉टीम ने ,गोवा,मुंबई,बैंगलोर,कोलकाता ,हैदराबाद,कोच्चि सहित देश के 20 से अधिक बड़े शहरों की यात्राएं कीं।

👉इसके अलावा इंदौर,भोपाल,ग्वालियर जाने के लिए एसी ट्रेन यात्रा का भरपूर आनंद लिया गया।

◽कार खरीदी, डीजल–मरम्मत में लाखों फूंके यहीं नहीं, इसी फंड से 7.5 लाख रुपये की कार खरीदी गई।कार के डीजल और मरम्मत पर करीब 8 लाख रुपये खर्च कर दिए गए।यानी रिसर्च से ज्यादा पैसा गाड़ियों और यात्राओं पर उड़ाया गया।

किसानों को सिर्फ कागजों पर ट्रेनिंग

घोटाले की परतें यहीं नहीं खुलतीं। ◽जबलपुर, भिंड, मुरैना सहित कई जिलों के किसानों को सिर्फ कागजों में ट्रेनिंग देना दिखाया गया, जबकि जमीनी स्तर पर प्रशिक्षण होने के कोई ठोस प्रमाण नहीं मिले।

👉बड़े सवाल

◽क्या पंचगव्य योजना सिर्फ भ्रष्टाचार का माध्यम बन गई?

◽रिसर्च फंड के खर्च की निगरानी किसने की?

◽जिम्मेदार अधिकारियों पर कब होगी कार्रवाई?

👉यह घोटाला न केवल सरकारी धन की बर्बादी है, बल्कि वैज्ञानिक अनुसंधान और किसानों के नाम पर जनता के भरोसे के साथ किया गया खुला खिलवाड़ भी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *