कटनी शहर से एक चौंकाने वाला और सनसनीखेज मामला सामने आया है

एक निजी अस्पताल पर अपने ही कर्मचारियों को घंटों बंधक बनाकर रखने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। मामला एमजीएम हॉस्पिटल से जुड़ा है, जहाँ कथित तौर पर पैसों की हेराफेरी के शक में कर्मचारियों के साथ गैरकानूनी व्यवहार किया गया। पीड़ित पक्ष अब न्याय की गुहार लेकर पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुँचा है।

◽कटनी के एमजीएम हॉस्पिटल पर बेहद गंभीर आरोप लगे हैं। आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने अपने ही कर्मचारियों को पैसों की हेराफेरी के संदेह में घंटों तक एक कमरे में बंद कर बंधक बनाए रखा। पीड़ितों का कहना है कि यह पूरी तरह गैरकानूनी और अमानवीय कृत्य है।

बरही थाना क्षेत्र के ग्राम मोहनी निवासी बालकिशन पटेल ने पुलिस अधीक्षक को सौंपे शिकायती पत्र में बताया कि वह पिछले आठ वर्षों से एमजीएम अस्पताल के मेडिकल स्टोर में कार्यरत हैं। ◽बालकिशन का आरोप है कि अस्पताल संचालक दीपक गुप्ता और मैनेजर संजय तिवारी ने उन पर और उनके तीन अन्य साथियों—यशवंत पटेल, राहुल पटेल और राहुल रजक—पर करीब 60 लाख रुपए की चोरी का झूठा आरोप लगाया।

◽पीड़ित बालकिशन के अनुसार, 23 दिसंबर की दोपहर से लेकर 24 दिसंबर की रात करीब 11 बजे तक उन्हें अवैध रूप से बंधक बनाकर रखा गया। इस दौरान अस्पताल प्रबंधन की ओर से उन पर 15-15 लाख रुपए देने का दबाव बनाया गया। आरोप है कि कर्मचारियों को डराया-धमकाया गया, मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया और जबरन स्वीकारोक्ति कराने की कोशिश की गई।

◽सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि बालकिशन के परिजनों ने भय के चलते अपनी जमीन की रजिस्ट्री अस्पताल प्रबंधन को सौंप दी, जिसके बाद उन्हें रिहा किया गया। पीड़ित का कहना है कि वह पूरी तरह निर्दोष हैं और उन्हें साजिश के तहत फंसाया जा रहा है।

◽बालकिशन पटेल ने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि मेडिकल स्टोर में एक रुपए के सामान का फर्जी बिल 25 हजार रुपए तक बनाया जाता था। जब उन्होंने इस कथित धांधली का विरोध किया, तो उन्हें झूठे मामले में फंसाने की धमकी दी गई।

◽बालकिशन पटेल ने बताया “मुझ पर और मेरे साथियों पर 15-15 लाख रुपए देने का दबाव बनाया जा रहा है। मेरी जमीन की रजिस्ट्री भी उनके कब्जे में है। मैं निर्दोष हूं और मुझे जबरन फंसाया जा रहा है।”

◽पीड़ित युवक के परिजन पूरे मामले को लेकर पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुँचे और लिखित शिकायत सौंपते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

◽वहीं पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शिकायत प्राप्त हो चुकी है और मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी गई है। सभी पक्षों के बयान दर्ज किए जाएंगे और तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

◽अब सवाल यही उठता है कि क्या कोई निजी अस्पताल कानून से ऊपर हो सकता है? क्या पैसों के शक में किसी कर्मचारी को बंधक बनाना जायज़ है? और अगर यही अपराध कोई आम नागरिक करता, तो क्या अब तक कार्रवाई नहीं हो चुकी होती?

फिलहाल जांच जारी है, लेकिन पूरे शहर की निगाहें इस मामले पर टिकी हैं।

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